Friday, May 15, 2009

घुंघट में गोरी शरमाएं

मुख में घुघंट सर पे गागर,
गोरी जाए पनघट की ओर,

खाली गागर में प्यास लिए,
प्रीतम की मन में आस लिए,
दो नयनो से मदिरा छलकाए ।
घुघंट में गोरी शरमाएं ।।


पथ पथरीला नग्‍न पांव है,
तलवों में हो गए घाव है,
निरंतर लक्ष्‍य को बढती जाए ।
घुंघट में गोरी शरमाए ।।

पायल की हल्‍की छम छम पे,
सांसे भी रूक रूक थम थम के,
झर झर बहते झरने गाए ।
घुंघट में गोरी शरमाए ।।

पूनमचंद गुप्ता

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